एक जमाना था ..
एक जमाना था,
इश्क़ कि होली सिर्फ तेरे साथ खेला करते थे..
अब ना होली है, ना दिवाली, अब खेली भी तो ऐसे खेलेंगे,
कि हर चेहरे पें हमारे इश्क़ का रंग हो , क्युंकी मुझे फरक नही पडता ..!!
एक जमाना था,
हर दिन , हर पल, तेरे लिये खुदा से मन्नते मांगते थे..
अब उस खुदगर्ज खुदा के सामने ना झुकता हुं, ना उसको मानता हु,
अब तू खुद खुदा बनकर भी आये तो मुझे फरक नहि पडता ..!!
एक जमाना था,
जब ये दिल सिर्फ और सिर्फ तेरे लिये धडकता था..
अब तुझे याद करणा तो छोड,
ये कम्बक्त दिल हमेशा के लिये धडकना छोड भी दे तो मुझे फरक नही पडता ..!!
एक जमाना था,
तुझे खोने से , अकेलेपण से , तनहाई से डरता था,
अब इतना अकेले पण से लडा हुं कि तूने तनहाई कि का कफन भी बनाया तो मुझे फरक नही पडता ..!!
एक जमाना था,
पहली बार छोड जाने के बाद भी तुझे अपनाया था..
फिर वापस छोड दिया,
अब तुझे इतना पीछे छोड आया हुं कि एक बार क्या हजार बार भी छोड जाये तो मुझे फरक नही पडता ..!!
एक जमाना था,
तेरे यादो मे फन्हा रहते थे..
तुम इतना बदल जाओगे ये मालूम न था,
अब तेरे दिल मे पन्हा तो छोड..
तू खुद मुहाब्बत बनके भी मेरे पास आये तो मुझे फरक नही पडता ..!!
एक जमाना था,
तेरी तरफ कोई देखे, कोई छुये तो जलन सी होती थी...
अब खुद को इतना जला चुका हुं कि ,
तू किसी और कि बाहो मे सो भी जाये तो मुझे फरक नही पडता ..!!
एक जमाना था,
तेरे सिवा कोई नही था दुनिया मे.. खुद से ज्यादा तुझे प्यार किया करते थे...
अब मुहाब्बत के खाई मे इतना सफर कर चुका हुं कि ,
तू इश्क़ कि डोली भी मेरे लिये सजाये तो मुझे फरक नही पडता ..!!
एक जमाना था,
तेरे साथ हर एक पल गुजारणे के लिये तरसते थे..
साथ मे खाना खाते थे, घुमा करते थे,
अब परहेज किया है कूछ ऐसे चीजो को कि जैसे तू मर चुकी है मेरे लिये ..
क्युंकी मुझे फरक नही पडता ..!!
एक जमाना था,
तुझे पाकर मै खूद को खुश-नसीब समझता था,
अब रिश्तो कि बद-नसिबी छोड तू खुद हाथो कि लकीर भी बन जाये तो मुझे फरक नही पडता ..!!
~ मुकुंद पाडळे (17 oct 2017 1.40am)
(ref : unknown youtube video )
khup chan .. :) keep it up bro.. u r multi-talented guy i have ever seen !! all the best
ReplyDeletethanks ajay :)
Deleteअप्रतिम ..
ReplyDeleteNice one.. Waiting for more...khup mast
ReplyDeleteAwesome mukund
ReplyDeletethanks bro :)
DeleteAwesome dear..... Keep it up.... Waiting for next blog
DeleteManatlya tochanila penachya toka sarkha adhar nahi..
ReplyDeleteKondanarya bhavananna shabda sarkha adhar nahi..
Sundar rachana.
thanks !! :)
DeleteI know the date 17 oct.
ReplyDeletewho are you ?
Deleteकविता वाचून मन अगदी सुन्न झालं... काही क्षण शब्द।च सुचेना की प्रत्युत्तर काय द्यावे.... नि:शब्द
ReplyDeleteThank you so much :)
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