वो साजिश

वो साजिश हि थी मेरे दोस्त..
जिसने कहाणी के पन्ने हि पलट दिये..!!
मुहोब्बत होती तो,
हर एक पन्ने पे यादो के जनाजे उठ जाते.. !!


- मुकुंद पाडळे

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