बात.. जो दोस्ती की थी..!!

कुछ शख़्स दोस्त बनके हमें ख़रीदने निकले थे...

बोल देते..
एक बार क्या, हम हज़ार बार ख़ुद ही लूट जाते..

बात.. जो दोस्ती की थी..!!

- मुकुंद पाडळे

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